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मुझसे 4 पिढी पीछे के पुर्वज मेरे पिताजी के दादाजी आदरणीय “स्व.कन्हैया लाल खत्री जी” इस प्रतिष्ठान के संस्थापक सदस्य है ! कलांतर में पंजाब प्रांत एवं पिछले 4 पिढीयों से मुजफ्फरपुर (बिहार) में निवासित प्रतिष्ठित सेठ (खत्री) परिवार के खत्री स्व.बलदेव प्रसाद सेठ के पीसरे संतान के रुप में जन्में स्व.कन्हैया लाल खत्री जी का जन्म वर्ष 1876 में हुआ था ! वर्ष 1907 में सासाराम (बिहार) के कपूर परिवार में विवाह सम्पन्न होने के पश्चात सासाराम (बिहार) के स्थाई निवासी हो गये ! एक सम्पन्न चान्दी व्यवशायी के पारिवारिक पृष्ठ भूमि में स्वयं भी सफल संचालन कर दूर-दूर तक चर्चित हुए ! राजशाही जीवन शैली में वर्ष 1909-13 के बीच 2 पुत्र एवं 1 पुत्री के पिता बनें ! वर्ष 1920 में पत्नि के असमयिक निधन के पश्चात अवसाद की स्थिति में धन से विरक्ति होने और धार्मिक प्रवृति के साथ-साथ राजशाही जीवन शैली के वजह से कारोबार सहित समस्त सम्पत्तियों का क्षय हो गया और व्यवशाय विहीन होने के पश्चात सासाराम के उत्तरी क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक श्री हनुमान मन्दिर के पास आकर बस गये और भक्ति में जीवन व्यतीत करने लगे ! उस समय मन्दिर परिसर में एवं आस-पास भगवान के भोग के लिये कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी ! वर्ष 1920 में ही मन्दिर संचालन समिति द्वारा मन्दिर परिसर में किराये पर एक दूकान देकर मन्दिर परिवार द्वारा हनुमान जी के राग-भोग हेतु बसाया गया ! रोजी रोटी के लिये संघर्ष कर रहा एक बिखर चुका परिवार पुन: शुन्य से संघर्ष कर धीरे-धीरे स्थापित होने लगा ! अच्छा चरित्र,समर्पण और वर्षों संघर्ष के पश्चात हनुमान जी के कृपा से यही परिवार के भरण-पोषण का भी सहारा बना ! विगत 100 वर्षों में अनेकों बार स्वरुप,नाम एवं पिढी दर पिढी मालिक भी बदले ! वर्तमान में चौथी और पांचवी पिढी प्रेम और समर्पण के साथ सेवारत है ! कालांतर में ममता मिष्ठान भण्डार,जया-विजया स्वीट हाउस एवं खत्री स्वीट्स के नाम से चर्चित प्रतिष्ठान ही आज का “बजरंग भोग” है ! संस्थापक के अलावे परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा भी समय-समय पर अल्प काल के लिये यह प्रतिष्ठान संचालित हुआ ! संस्थापक स्व.कन्हैया लाल खत्री जी एवं उनके बडे पुत्र के छोटे पुत्र तीसरी पिढी के मेरे पिताजी स्व.विश्वनाथ प्रसाद खत्री जी के द्वारा यह प्रतिष्ठान आजीवन संचालित हुआ ! लगभग 35-36 वर्ष संस्थापक स्व.कन्हैया लाल खत्री जी सेवारत रहे और वर्ष 1956 में स्वर्गवासी हुए तथा लगभग 60-65 वर्ष स्व.विश्वनाथ प्रसाद खत्री जी सेवारत रहे और वर्ष 2014 में स्वर्गवासी हुए ! बजरंग भोग को पहचान दिलाने में इन दोनों सदस्यों का अहम योगदान है ! इनके बाद के सभी पिढीयों को इन्हीं दोनों सदस्यों के परिश्रम का फल प्राप्त हो रहा है और होगा ! अपने पिता की एकमात्र पुत्र संतान चौथी पिढी में मै स्वयं विगत 34 वर्षों से मात्र 13 वर्ष की अवस्था से वर्ष 1985 से ही इस प्रतिष्ठान को गति और सम्मान दिलाने में पिताजी के जीवनकाल से ही भगवान के भक्तों की सेवा में सेवारत हूं ! ईश्वरीय कृपा से आज विदेशों में भी इस हनुमान जी के भक्त निवास करते है जो भारत आने पर बजरंग भोग का प्रसाद (भोग) लेना ही पसन्द करते है ! अब पांचवी पिढी के मेरे दोनों पुत्र क्रमश: खत्री साईं सत्यम एवं खत्री साईं शिवम भी अपने शैक्षणिक अवकाश के दिनों में मेरे सानिध्य में भक्तों को सेवा प्रदान कर आनन्दित होते है ! इस प्रतिष्ठान के “शताब्दी समारोह वर्ष” के शुभ मौके पर चौथी एवं पांचवी पिढी के सन्युक्त प्रयास से अब भक्तों को विभिन्न सुविधायें प्रदान की जा रही है !

विगत 100 वर्षों से मैं और मेरे पुर्वजों के कुशल नेतृत्व,धार्मिक प्रवृति,सेवा भाव,गुणवत्ता एवं समर्पण तथा विगत 100 वर्षों की सेवा एवं अपनापन से संतुष्ट परिवार के सदस्य की तरह प्रेम पूर्ण व्यवहार करने वाले सम्मानित ग्राहकों के आशीर्वाद के फल स्वरुप वर्ष 1920 में स्थापित “बजरंग भोग” वर्तमान वर्ष 2020 में बडे गर्व एवं हर्ष के साथ “शताब्दी समारोह वर्ष” में प्रवेश कर चुका है !